क्या इसको महिलाओं का सम्मान कहते है ?क्या इसको महिलाओं का सम्मान कहते है ?

समपूर्ण सृष्टि में भारत वर्ष को अपनी संस्कृति , रीति ,नीति, संस्कार एवम सभ्यता के लिए जाना जाता है, भारत एक ऐसी देव भूमि है जहा दुर्गा को माँ के रूप में पूजा जाता है और आदि अनादि काल से हर युग मे महिलाओं ने अपने आपको साबित किया है और पृथ्वी से अंतरिक्ष तक महिलाओं ने भारत का मान- सम्मान बढ़ाया है । अजमेर के विद्धवान अधिवक्ता जो कि स्वयंभू उच्चकोटि के सोशल मीडिया गुरु और ब्लोगिस्ट समझते है उन्होंने महिला अधिकारी के लिए जो टिपणी की है बहुत ही निम्न स्तर की है और इसकी निंदा करने के लिए मेरे शब्दकोश में शब्द ही नही है । ऐसी महिला जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपने आपको सिद्ध किया एवम भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन होकर परिवार ,समाज और राष्ट्र का मान बढ़ाया उनके लिए ऐसी अनर्गल टिपणी कर इस विद्धवान अधिवक्ता ने सभी पराकाष्ठा लांग दी है । इनके सभी लेख वैसे तो आम तौर पर राजनीति के क्षेत्र में इनके प्रतिद्वंदियो को अपमानित करने के लिए और अनावश्यक दबाव बनाने के लिए ही होते है, उनके लिए भी यह सज्जन जिन शब्दों का प्रयोग करते है बहुत ही आपत्तिजनक होते है परंतु इनके मानसिक दिवालियापन के आगे उन शब्दों का प्रतिकार करना कोई भी समझदार व्यक्ति उचित नही समझता है । अक्सर मैने उन लोगो से यह सुना है कि -" जाने दो -लिखने दो " कीचड़ में पत्थर फेंकने से उस कीचड़ के छीटे स्वयं के भी लगते है । परंतु यह प्रासंगिक है कि अगर सही समय पर ही इनको रोक दिया होता तो आज यह नौबत नही आती । भारत की गौरवपूर्ण संस्कृति का यह विद्धवान अधिवक्ता ऐसे चीर हरण नही करते हमारे संस्कार ऐसे तार - तार नही होते और मेरे अजमेर को ऐसे अपमानित नही होना पड़ता । इस अनर्गल टिप्पणी का प्रतिकार करने की जो हिम्मत महिलाओ ने दिखाई है एक साहसिक और निर्भीक निर्णय है । कोटि कोटि साधुवाद और धन्यवाद देना चाहता हु और नमन करता हु ऐसी कोख को जिसने इस मातृ शक्ति को जम्म दिया । ऐसे समाज कंठको को कानूनन कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए । उम्मीद करता हु यहा कानून अंधा नही बनेगा और समाज मे एक ऐसी अलख जगायेगा ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा दुःसाहस नही कर सके ।

हम सब भारत की जो संस्कृति और गौरव है "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः " को बचाने के लिए मातृ शक्तियों के साथ खड़े है। ईश्वर उस महान अधिवक्ता को सद्बुद्धि प्रदान करे और उन मातृ शक्ति को नमन कर अपनी गलती स्वीकार करने की ताकत प्रदान करे । -शक्ति प्रताप सिंह राठौड़ पीपरोली, पूर्व सदस्य,पंचायत समिति सरवाड़

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